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IVF PROCESS (INVITRO/FERTILIZATION)

IVF PROCESS (INVITRO/FERTILIZATION)

कुछ विशेष परस्थितियों में अण्डों और स्पर्म का मिलन नहीं हो पाता और वह महिला मातृत्व से वचत रहती है। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) ऐसी ही परिस्थितियों का इलाज हैं।

IVF (इन विट्रो फर्टिलायजोन) मतलब प्रयोगशाला में अण्डा के निषेचन (Fertilization) कराने से है। सरल भाषा में कहें तो महिला के शरीर से अण्डा निकालकर उनका मिलाप शुक्राणुओं से किया जाता है यह तरीका उन स्त्रियों में कारगर होता है, जिनकी फैलोपियन ट्यूब या तो बंद हो या ख़राब हो या फिर हो ही नहीं । ऐसी महिलाएँ जिन्हे एण्डोमेट्रियोसिस ( एक किस्म की बिमारी) या अण्डे बनने संबंधी समस्या हो अथवा जिनके पति के शुक्राणुओं की गुणवत्ता अच्छी न हो, उनमें भी इस विधि का प्रयोग उपयोगी होता है। यदि उम्र बढ़ती जा रही है तो आई.व्ही.एफ. की सलाह दी जाती है।

 

IVF की प्रक्रिया कई चरणों में परी होती हैं:

Down Regulation

इसमें मासिक आने से पहले या पहले दिन से कुछ इंजेक्शन जो इिन्स्युलिन के तरह चर्बी में लगाये जाते हैं। इसमें महिला के होर्मोन दब जाते हैं और अण्डे बनाने की क्रिया को बेहतर नियंत्रित किया जाता है। ये इंजेक्शन उसाईट रिटवल यानि अंडा निकालने के 36 घंटे के पहले दिये जाते हैं।

SUPEROVULATION:-

(सुपर ओव्युलोन या अण्डे बनना) सामान्यतः ओवरी हर महीने एक ही अण्डा पैदा करती है। आई.वी.एफ. के लिए अधिक अण्डों की आवश्यकता होती हैं। इसके लिए गोनेडोट्रॉफिन्स यानि हॉर्मोन्स के इंजेक्शन देकर ओवरी को अधिक अण्डे बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस क्रिया को सुपर ओव्युलेशन कहते हैं। इस प्रक्रिया में लगभग दस से बारह दिन में अण्डे बनकर तैयार हो जाते हैं, इस दौरान महिला को लगभे चार-पांच बर सोनोग्राफी हेतु क्लिनिक पर आना होता है। ये इंजेक्शन काफी महंगे होते हैं। कम उम्र एवं कम वजनवाली महिला को कम इंजेक्शन लगते हैं। अधिक उम्र अधिक वजन या हार्मोन के असंतुलन वाली महिला को अधिक इंजेक्शन लगते हैं।

Ovum-Pick-UP (OPU) :-

अण्डे निकालना: हार्मोन के इंजेक्शन देकर अण्डे बनाने की प्रक्रिया को सुनियोजित तरीके से नियंत्रण में रखा जाता है और सोनाग्राफी द्वारा उनके विकास को नियमित रूप से जांचा जाता हैं। अण्डों के विकास को देखते हुए अण्डे निकालने के दिन निश्चित किया जाता है। अण्ड़े निकालने का काम भी सोनोग्राफी की सहायता से ही किया जाता हैं। योनि मार्ग से सुई डालकर जितने अधिक संभव हो अण्डे निकाले जाते हैं। इस कार्य में लगभग 20 मिनट लगते हैं। तथा इस दौरान मरीज को हल्की बेहोशी दी जाती है। अधिकतम एक या दो घंटों में महिला घर जा सकती है।